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भलाई की जीत की कहानी.The story of the win of goodness in Hindi.


शेर सिंह नाम का एक किसान था. वह बड़ा घमंडी और झगड़ालू था. गांव वाले भी उससे दूर ही रहते थे.उस गांव में कृपाल सिंह नाम का एक किसान आकर बस गया वह मीठा बोलता और सब की सहायता करता था.गांव वालों ने कृपाल सिंह से कहा तुम शेरसिंह से दूर ही रहना वह बहुत झगड़ालू है. कृपाल सिंह ने  हंसकरकहां शेर सिंह मुझसे झगड़ा करेगा तो मैं उसे सही पाठ पढ़ा दूंगा.,

 शेर सिंह को यह बात पता चल गया.वह  गुस्सा से लाल पीला हो गया. एक दिन उसने कृपाल सिंह के खेत में बेल छोड़ दिया. कृपाल सिंह ने  बैल को खेत से बाहर कर दिया परंतु शेर सिंह से कुछ नहीं कहां.एक बार कृपाल सिंह की एक मित्र ने उसके लिए मीठे तरबूज भेजें कृपाल सिंह ने सभी गांव वालों के घर एक एक तरबूज भेज दिया. उसने एक तरबूज शेर सिंह के यहां अभी भेजा पर शेर सिंह ने यह कह कर लौटा दिया कि वह भिखारी नहीं.

बरसात आई ! शेरसिंह बैलगाड़ी में अनाज भरकर शहर चला.नाले में बैलगाड़ी फस गई.बहुत प्रयास करने पर भी बैलगाड़ी नहीं निकली. कोई भी गांव वाला शेर सिंह की सहायता के लिए नहीं आया. कृपाल सिंह को यह बात पता चल गई. वह तुरंत अपने बैल लेकर नाले पर पहुंचा. शेर सिंह ने कहा"मुझे तुम्हारी सहायता नहीं चाहिए. तुम लौट जाओ कृपाल सिंह बोले तुम जितना भी कुछ करना चाहो करो, पर मैं तुम्हें रात में यहां अकेला नहीं छोड़ सकता. कृपाल सिंह ने बैलगाड़ी में अपने बैल जोत दिए. उसके बलवान बैलो ने गाड़ी को बाहर खींच निकाला.

शेर सिंह का घमंड चूर हो गया था. उसे अपने व्यवहार पर पछतावा हुआ.शेर सिंह पूरी तरह बदल गया. भलाई ने बुराई पर विजय प्राप्त की. 


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